vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय
»
श्लोक 22-23h
श्लोक
7.123.22-23h
स तु तं प्रतिविव्याध पञ्चभिर्निशितै: शरै:॥ २२॥
रुक्मपुङ्खैर्महेष्वासो गार्ध्रपत्रैरजिह्मगै:।
अनुवाद
तब महाधनुर्धर सात्यकि ने भी स्वर्ण पुच्छ और गिद्ध पंख वाले पांच तीखे और सीधे बाणों से दु:शासन को घायल करके उसका बदला लिया।
Then the great archer Satyaki also took revenge by piercing Dushasan with five sharp and straight arrows having golden tails and vulture's feathers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×