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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.123.19-20h 
ततस्ते पर्यवर्तन्त सर्वे द्रोणरथं प्रति॥ १९॥
भयात् पतगराजस्य गर्तानीव महोरगा:।
 
 
अनुवाद
जैसे बड़े-बड़े सर्प गरुड़ के भय से अपने बिलों में छिप जाते हैं, उसी प्रकार आपके सभी पराजित सैनिक द्रोणाचार्य के रथ के चारों ओर एकत्र हो गये।
 
Just as large serpents hide in their holes out of fear of Garuda, similarly all your defeated soldiers gathered around Dronacharya's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)