श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  7.122.69-70h 
क्षत्रियाश्च महाराज ये चान्ये तव सैनिका:।
अवश्यं समरे द्रोणो धृष्टद्युम्नेन सङ्गत:॥ ६९॥
वशमेष्यति नो राजन् पञ्चाला इति चुक्रुशु:।
 
 
अनुवाद
महाराज! समस्त क्षत्रियों तथा आपके अन्य सैनिकों ने भी उन दोनों के युद्ध की प्रशंसा की। राजन! पांचाल्योध ने यह कहकर शोर मचाना आरम्भ कर दिया कि द्रोणाचार्य युद्धभूमि में धृष्टद्युम्न के साथ उलझे हुए हैं। वे अवश्य ही हमारे अधीन हो जायेंगे।
 
Maharaj! All the Kshatriyas and your other soldiers also praised the fight of those two. King! Panchalyodha started making noise saying that Dronacharya is engaged with Dhrishtadyumna in the battlefield. He will definitely be subdued by us. 69 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)