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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय
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श्लोक 17-18h
श्लोक
7.122.17-18h
यदि तावत् कृता बुद्धि: पलायनपरायणा॥ १७॥
पृथिवी धर्मराजाय शमेनैव प्रदीयताम्।
अनुवाद
यदि तुमने पलायन करने का निश्चय कर ही लिया है, तो शांतिपूर्वक इस पृथ्वी का राज्य धर्मराज युधिष्ठिर को सौंप दो॥17 1/2॥
If you have decided to flee, then peacefully hand over the kingdom of this earth to Dharmaraja Yudhishthira.॥ 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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