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mahabharat 7.122.10: यह कौरव सेना, यह राज्य और इसका राजा दुर्योधन - ये सब दयनीय हो गए हैं, क्योंकि तू राजा का क्रूर भाई होकर आज युद्ध से मुंह मोड़कर भाग रहा है॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.122.10 
शोच्येयं भारती सेना राज्यं चैव सुयोधन:।
यस्य त्वं कर्कशो भ्राता पलायनपरायण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह कौरव सेना, यह राज्य और इसका राजा दुर्योधन - ये सब दयनीय हो गए हैं, क्योंकि तू राजा का क्रूर भाई होकर आज युद्ध से मुंह मोड़कर भाग रहा है॥ 10॥
 
This Kaurava army, this kingdom and its king Duryodhana - all have become pitiable because you, being the cruel brother of the king, are today turning your back on the battle and running away.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)