श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.121.5 
अत्यद्भुतमिदं तात त्वत्सकाशाच्छृणोम्यहम्।
एकस्य बहुभि: सार्धं शत्रुभिस्तैर्महारथै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! मैं आपसे एक बड़ी विचित्र बात सुन रहा हूँ कि एक अकेले सात्यकि और शत्रु सेना के उन असंख्य महारथियों के बीच इतना भयंकर युद्ध हुआ।
 
Father! I am hearing from you a very strange thing that such a fierce battle took place between a single Satyaki and those numerous great warriors of the enemy army. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)