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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन
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श्लोक 32
श्लोक
7.121.32
तथैव कुरव: सर्वे नाश्मयुद्धविशारदा:।
अभिद्रवत मा भैष्ट न व: प्राप्स्यति सात्यकि:॥ ३२॥
अनुवाद
इसी प्रकार समस्त कौरव भी पाषाण युद्ध में निपुण नहीं हैं। अतः तुम डरो मत। आक्रमण करो। सात्यकि तुम्हें पकड़ नहीं सकता।॥32॥
‘Similarly, all the Kauravas are also not proficient in stone fighting. So do not be afraid. Attack. Satyaki cannot catch you.’॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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