श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.121.19-20h 
तत्राद्भुतमपश्याम शैनेयचरितं महत्॥ १९॥
यदेको बहुभि: सार्धमसम्भ्रान्तमयुध्यत।
 
 
अनुवाद
वहाँ हमने सात्यकि का असाधारण चरित्र देखा जो बहुत से योद्धाओं के साथ अकेले ही निर्भय होकर युद्ध कर रहे थे ॥19 1/2॥
 
There we saw the extraordinary character of Satyaki who was fighting alone with a large number of warriors without any fear. ॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)