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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन
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श्लोक 33
श्लोक
7.120.33
दु:शासन: षोडशभिर्विव्याध शिनिपुङ्गवम्।
शकुनि: पञ्चविंशत्या चित्रसेनश्च पञ्चभि:॥ ३३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् दुःशासन ने सोलह बाणों से शिनिप्रवर सात्यकि को, पच्चीस बाणों से शकुन को और पाँच बाणों से चित्रसेन को घायल कर दिया ॥33॥
Thereafter, Dushasana pierced Sinipravar Satyaki with sixteen arrows, Shakuna with twenty-five and Chitrasena with five arrows. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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