श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  7.120.31-32 
ततो दुर्योधनो राजा सात्वतस्य त्रिभि: शरै:॥ ३१॥
विव्याध सूतं निशितैश्चतुर्भिश्चतुरो हयान्।
सात्यकिं च त्रिभिर्विद्‍ध्वा पुनरष्टाभिरेव च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब राजा दुर्योधन ने सात्यकि के सारथि को तीन बाणों से और उसके चारों घोड़ों को चार तीखे बाणों से घायल कर दिया। फिर सात्यकि भी पहले तीन बाणों से घायल हो गया और फिर आठ बाणों से बुरी तरह घायल हो गया।
 
Then King Duryodhana wounded Satyaki's charioteer with three arrows and his four horses with four sharp arrows. Then Satyaki was also pierced first with three arrows and then deeply wounded with eight arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)