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mahabharat 7.120.30-31h: महापुरुष और शिनि के पौत्र सात्यकि निडर थे, वे बड़ी फुर्ती से अपने अस्त्र-शस्त्र चलाते थे और अपना कौशल दिखाते हुए अर्जुन से भी अधिक वीरता से युद्ध करते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.120.30-31h 
अत्यर्जुनं शिने: पौत्रो युध्यते पुरुषर्षभ:॥ ३०॥
वीतभीर्लाघवोपेत: कृतित्वं सम्प्रदर्शयन्।
 
 
अनुवाद
महापुरुष और शिनि के पौत्र सात्यकि निडर थे, वे बड़ी फुर्ती से अपने अस्त्र-शस्त्र चलाते थे और अपना कौशल दिखाते हुए अर्जुन से भी अधिक वीरता से युद्ध करते थे।
 
Satyaki, the great man and grandson of Shini, was fearless, wielding his weapons with great agility and displaying his skill, fighting with even more valour than Arjuna. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)