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mahabharat 7.119.6: युद्धस्थल में सेवकों सहित अदम्य योद्धा द्रोणाचार्य को परास्त करके मैं मानता हूँ कि इस समय वीर अर्जुन हमारे हाथ में आ गया है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.119.6 
हस्तप्राप्तमहं मन्ये साम्प्रतं सव्यसाचिनम्।
निर्जित्य दुर्धरं द्रोणं सपदानुगमाहवे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में सेवकों सहित अदम्य योद्धा द्रोणाचार्य को परास्त करके मैं मानता हूँ कि इस समय वीर अर्जुन हमारे हाथ में आ गया है॥6॥
 
Having defeated the indomitable warrior Dronacharya along with his servants on the battlefield, I believe that at this moment the brave Arjuna has come into our hands.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)