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सात्यकिं ते समासाद्य पृतनास्वनिवर्तिनम्॥ ३९॥
बहवो लघुहस्ताश्च शरवर्षैरवाकिरन्।
अनुवाद
युद्ध में कभी पीछे न हटने वाले सात्यकि को अपनी सेना के बीच में पाकर, बहुत से यवन, जो शीघ्रता से हाथ हिलाने वाले थे, उन पर बाणों की वर्षा करने लगे।
Finding Satyaki, who never retreated in a battle, in the midst of his army, many Yavanas, who were quick to move their hands, began showering arrows upon him. 39 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥