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mahabharat 7.119.38-39h: वे उत्तम घोड़े, जो मन और वायु के समान वेगवान थे, मानो आकाश से जल पी रहे हों, शीघ्र ही युयुधान को यवनों के पास ले गए।   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.119.38-39h 
ते पिबन्त इवाकाशं युयुधानं हयोत्तमा:॥ ३८॥
प्रापयन् यवनान् शीघ्रं मन:पवनरंहस:।
 
 
अनुवाद
वे उत्तम घोड़े, जो मन और वायु के समान वेगवान थे, मानो आकाश से जल पी रहे हों, शीघ्र ही युयुधान को यवनों के पास ले गए।
 
Those excellent horses, as fast as the mind and the wind, as if drinking water from the sky, soon took Yuyudhaana to the Yavanas. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)