श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.119.37-38h 
संजय उवाच
एवमुक्तस्तदा सूत: शिक्षितान् साधुवाहिन:॥ ३७॥
शशाङ्कसंनिकाशान् वै वाजिनो व्यनुदद् भृशम्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जब सात्यकि ने ऐसा कहा, तब सारथि ने उन घोड़ों को बड़ी तेजी से हाँक दिया, जो चन्द्रमा के समान श्वेत रंग के, सुशिक्षित और सवारी के लिए उत्तम थे।
 
Sanjaya says - O King! When Satyaki said this, the charioteer drove the horses with great speed which were moon-white in colour, well-trained and excellent for riding.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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