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mahabharat 7.119.36-37h: आज मैं हजारों राजाओं का वध करके इन राजाओं के साथ मिलकर महाबली पाण्डवों के प्रति अपना प्रेम और भक्ति प्रदर्शित करूँगा। अब कौरवों को मेरे बल, पराक्रम और कृतज्ञता का ज्ञान हो जाएगा। ॥36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.119.36-37h 
अद्य स्नेहं च भक्तिं च पाण्डवेषु महात्मसु।
हत्वा राजसहस्राणि दर्शयिष्यामि राजसु॥ ३६॥
बलं वीर्यं कृतज्ञत्वं मम ज्ञास्यन्ति कौरवा:।
 
 
अनुवाद
आज मैं हजारों राजाओं का वध करके इन राजाओं के साथ मिलकर महाबली पाण्डवों के प्रति अपना प्रेम और भक्ति प्रदर्शित करूँगा। अब कौरवों को मेरे बल, पराक्रम और कृतज्ञता का ज्ञान हो जाएगा। ॥36 1/2॥
 
Today, after killing thousands of kings, I will demonstrate my love and devotion towards the great Pandavas in the company of these kings. Now the Kauravas will know about my strength, valour and gratitude. ॥ 36 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)