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mahabharat 7.119.26-27: सात्यकि बोले - सूत! जिस प्रकार इन्द्र दैत्यों का वध करते हैं, उसी प्रकार आज मैं इन मथमुण्डे काम्बोजों का वध करूँगा और ऐसा करके अपनी प्रतिज्ञा पूरी करूँगा। अतः आप मुझे इनके पास ले चलें। इन सबको मारकर ही आज मैं अपने प्रिय मित्र पाण्डवपुत्र अर्जुन के पास जाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  7.119.26-27 
सात्यकिरुवाच
मुण्डानेतान् हनिष्यामि दानवानिव वासव:॥ २६॥
प्रतिज्ञां पारयिष्यामि काम्बोजानेव मां वह।
अद्यैषां कदनं कृत्वा प्रियं यास्यामि पाण्डवम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि बोले - सूत! जिस प्रकार इन्द्र दैत्यों का वध करते हैं, उसी प्रकार आज मैं इन मथमुण्डे काम्बोजों का वध करूँगा और ऐसा करके अपनी प्रतिज्ञा पूरी करूँगा। अतः आप मुझे इनके पास ले चलें। इन सबको मारकर ही आज मैं अपने प्रिय मित्र पाण्डवपुत्र अर्जुन के पास जाऊँगा।
 
Satyaki said - Suta! Just as Indra kills demons, similarly today I will kill these Mathmunde Kambojas and by doing so I will fulfil my promise. So you take me towards them. Only after killing all of them, today I will go to my dear friend Pandava's son Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)