Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.119.20-23: शत्रुसूदन! आपने कवचधारी, क्रूर एवं युद्धप्रिय अनेक काम्बोजों को परास्त किया है। आपने धनुष-बाण से आक्रमण करने में कुशल यवनों को भी परास्त किया है। आपने शक, किरात, दर्ड, बर्बर, ताम्रलिप्त तथा अनेक म्लेच्छों को भी परास्त किया है, जो नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र हाथ में लिए हुए थे। इन अवसरों पर किसी प्रकार का भय नहीं था। फिर इस गौ के खुर के समान तुच्छ युद्धभूमि में आकर कैसा भय हो सकता है? आयुष्मान्! बताइए, इन दोनों में से किस मार्ग से मैं आपको अर्जुन के पास ले जाऊँ? 20-23। | mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया सुबहवो युद्धे निर्जिता: शत्रुसूदन।
दंशिता: क्रूरकर्माण: काम्बोजा युद्धदुर्मदा:॥ २०॥
शरबाणासनधरा यवनाश्च प्रहारिण:।
शका: किराता दरदा बर्बरास्ताम्रलिप्तका:॥ २१॥
अन्ये च बहवो म्लेच्छा विविधायुधपाणय:।
न च मे सम्भ्रम: कश्चिद् भूतपूर्व: कथंचन॥ २२॥
किमुतैतत् समासाद्य धीरसंयुगगोष्पदम्।
आयुष्मन् कतरेण त्वां प्रापयामि धनंजयम्॥ २३॥
अनुवाद
शत्रुसूदन! आपने कवचधारी, क्रूर एवं युद्धप्रिय अनेक काम्बोजों को परास्त किया है। आपने धनुष-बाण से आक्रमण करने में कुशल यवनों को भी परास्त किया है। आपने शक, किरात, दर्ड, बर्बर, ताम्रलिप्त तथा अनेक म्लेच्छों को भी परास्त किया है, जो नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र हाथ में लिए हुए थे। इन अवसरों पर किसी प्रकार का भय नहीं था। फिर इस गौ के खुर के समान तुच्छ युद्धभूमि में आकर कैसा भय हो सकता है? आयुष्मान्! बताइए, इन दोनों में से किस मार्ग से मैं आपको अर्जुन के पास ले जाऊँ? 20-23।
Shatrusudana! You have defeated many Kambojas who were wearing armour and were cruel and warlike. You have defeated the Yavanas who were skilled in attacking with bows and arrows. You have defeated the Shakas, Kiratas, Dardas, Barbarians, Tamraliptas and many other mlecchas who were carrying various kinds of weapons in their hands. There was no fear of any kind on these occasions. Then what fear can there be on coming to this battlefield which is as insignificant as the hoof of a cow? Ayushman! Tell me, by which of these two routes should I take you to Arjuna? 20-23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥