Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.118.5: भरत! सात्यकि का पराक्रम असह्य था। उसका धैर्य और बल महान था। वह इंद्र के समान पराक्रमी और आकाश में चमकते शरद ऋतु के सूर्य के समान तेजस्वी था। आपके समस्त सैनिक मिलकर भी उसे रोक नहीं सके॥5॥ | mahabharat अध्याय 7.118: सात्यकिद्वारा सुदर्शनका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असह्यविक्रान्तमदीनसत्त्वं
सर्वे गणा भारत ये त्वदीया:।
सहस्रनेत्रप्रतिमप्रभावं
दिवीव सूर्यं जलदव्यपाये॥ ५॥
अनुवाद
भरत! सात्यकि का पराक्रम असह्य था। उसका धैर्य और बल महान था। वह इंद्र के समान पराक्रमी और आकाश में चमकते शरद ऋतु के सूर्य के समान तेजस्वी था। आपके समस्त सैनिक मिलकर भी उसे रोक नहीं सके॥5॥
Bhaarat! Satyaki's valour was unbearable. His patience and strength were great. He was as powerful as Indra and as radiant as the autumn sun shining in the sky. Even all your soldiers combined could not stop him.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥