श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 118: सात्यकिद्वारा सुदर्शनका वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.118.3 
तमेवमुक्त्वा शिनिपुङ्गवस्तदा
महामृधे सोऽग्रॺधनुर्धरोऽरिहा।
किरन् समन्तात् सहसा शरान् बली
समापतच्छॺेन इवामिषं यथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाधनुर्धर शत्रुघ्न के समान अपने सारथि से ऐसा कहकर महाबली सात्यकि ने उस महासमर में अचानक सब ओर बाणों की वर्षा करके शत्रुओं पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे कोई बाज मांस के टुकड़े पर झपटता है।
 
Having said this to his charioteer, in that great battle, the great archer, Shatrughan, the mighty Satyaki, suddenly showered arrows on all sides and attacked the enemies in the same manner as an eagle pounces on a piece of meat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)