श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.117.26 
तत: शरशतेनैव युयुधानो महारथ:।
अविध्यद् ब्राह्मणं संख्ये हृष्टरूपो विशाम्पते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उस रणभूमि में महारथी सत्य ने हर्ष में भरकर भयंकर द्रोणाचार्य को सौ बाणों से घायल कर दिया॥26॥
 
Prajanath! In that battlefield, the great charioteer Satya, filled with joy, wounded the fierce Dronacharya with a hundred arrows. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)