श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.117.11 
लाघवाद् द्विजमुख्यस्य सात्वतस्य च मारिष।
विशेषं नाध्यगच्छाम समावास्तां नरर्षभौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजन! हाथों की चपलता की दृष्टि से हम श्रेष्ठ द्रोणाचार्य और सात्यकि में कोई भेद नहीं पा सके। वे दोनों ही पुरुषोत्तम के समान प्रतीत होते थे। 11॥
 
Honorable King! From the point of view of agility of hands, we could not find any difference between the best Dronacharya and Satyaki. Both of them appeared to be equal to the best of men. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)