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श्लोक 7.116.4  |
दुर्मुखो दशभिर्बाणैस्तथा दु:शासनोऽष्टभि:।
चित्रसेनश्च शैनेयं द्वाभ्यां विव्याध मारिष॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| आर्य! तत्पश्चात् दुर्मुख ने सात्यकि को दस बाणों से, दुःशासन को आठ बाणों से तथा चित्रसेन को दो बाणों से घायल कर दिया॥4॥ |
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| Arya! Thereafter Durmukh wounded Satyaki with ten arrows, Dushasana with eight and Chitrasena with two arrows. 4॥ |
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