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mahabharat 7.116.35-36h: तदनन्तर शिनि के पौत्र सत्य ने अर्जुन को देखने की इच्छा से बड़ी शीघ्रता से कृतवर्मा को अस्सी बाणों से वहीं मार गिराया।   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.116.35-36h 
ततोऽशीतिं शिने: पौत्र: सायकान् कृतवर्मणे॥ ३५॥
प्राहिणोत् त्वरया युक्तो द्रष्टुकामो धनंजयम्।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर शिनि के पौत्र सत्य ने अर्जुन को देखने की इच्छा से बड़ी शीघ्रता से कृतवर्मा को अस्सी बाणों से वहीं मार गिराया।
 
Then Shini's grandson Satya, with great haste in his heart wishing to see Arjuna, shot Kritavarma there with eighty arrows. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)