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mahabharat 7.116.25-26h: जैसे राहु आकाश में चन्द्रमा को ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार राजा दुर्योधन को सात्यकि द्वारा पीड़ित होते देख वहाँ के सभी लोग घबरा गए ॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.116.25-26h 
हाहाभूतं जगच्चासीद् दृष्ट्वा राजानमाहवे॥ २५॥
ग्रस्यमानं सात्यकिना खे सोममिव राहुणा।
 
 
अनुवाद
जैसे राहु आकाश में चन्द्रमा को ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार राजा दुर्योधन को सात्यकि द्वारा पीड़ित होते देख वहाँ के सभी लोग घबरा गए ॥25 1/2॥
 
Just as Rahu eclipses the Moon in the sky, similarly, seeing King Duryodhana being afflicted by Satyaki, all the people there became alarmed. ॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)