vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध
»
श्लोक 39-40h
श्लोक
7.115.39-40h
स विद्धो बहुभिर्बाणैर्जलसंधेन वीर्यवान्॥ ३९॥
नाकम्पत महाबाहुस्तदद्भुतमिवाभवत्।
अनुवाद
जलसंध के अनेक बाणों से घायल होने पर भी वीर महाबाहु सात्यकि का हृदय नहीं काँपा। यह अद्भुत बात थी।
Even after being wounded by many arrows of Jalasandh, the valiant Mahabahu Satyaki did not tremble. This was an amazing thing. 39 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×