Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.68: कृतवर्मा के उत्तम बाणों से अत्यन्त घायल होकर पराक्रमी भीमसेन अपने रथ में ऐसे काँपने लगे, जैसे भूकम्प के समय पर्वत काँप उठता है। | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गाढविद्धो बलवान् हार्दिक्यस्य शरोत्तमै:।
चचाल रथमध्यस्थ: क्षितिकम्पे यथाचल:॥ ६८॥
अनुवाद
कृतवर्मा के उत्तम बाणों से अत्यन्त घायल होकर पराक्रमी भीमसेन अपने रथ में ऐसे काँपने लगे, जैसे भूकम्प के समय पर्वत काँप उठता है।
The powerful Bhimasena, severely wounded by the excellent arrows of Kritavarma, began to tremble in his chariot like a mountain shaking during an earthquake. 68.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥