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mahabharat 7.114.54: हे माननीय! आपके ही अपराध के कारण यह महासंहार हुआ है। आपको इसका सारा दोष दुर्योधन पर नहीं डालना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.114.54 
आत्मापराधात् सुमहान् प्राप्तस्ते विपुल: क्षय:।
नैनं दुर्योधने दोषं कर्तुमर्हसि मानद॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे माननीय! आपके ही अपराध के कारण यह महासंहार हुआ है। आपको इसका सारा दोष दुर्योधन पर नहीं डालना चाहिए।
 
O honourable one! Due to your own crime you have witnessed this great massacre. You should not put the entire blame on Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)