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mahabharat 7.114.49: जो अपने हितैषी मित्रों की बातें नहीं सुनता, वह महान विपत्ति में पड़कर तुम्हारे समान ही शोक करता है ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.114.49 
सुहृदां हितकामानां वाक्यं यो न शृणोति ह।
स महद् व्यसनं प्राप्य शोचते वै यथा भवान्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जो अपने हितैषी मित्रों की बातें नहीं सुनता, वह महान विपत्ति में पड़कर तुम्हारे समान ही शोक करता है ॥49॥
 
He who does not listen to the words of his well-wishing friends, when in a great calamity, grieves just like you. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)