Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.27: संजय! युद्ध में रक्षा करने वाले तथा रक्षकों सहित रक्षा करने वाले के लिए पराजय ही एकमात्र सामान्य उपाय रह जाता है॥27॥ | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रक्ष्यते यश्च संग्रामे ये च संजय रक्षिण:।
एक: साधारण: पन्था रक्ष्यस्य सह रक्षिभि:॥ २७॥
अनुवाद
संजय! युद्ध में रक्षा करने वाले तथा रक्षकों सहित रक्षा करने वाले के लिए पराजय ही एकमात्र सामान्य उपाय रह जाता है॥27॥
Sanjaya! In a battle the only ordinary way left for the one who is being protected and the one being protected along with his protectors is defeat.॥27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥