Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.114.26: परन्तु वीर अर्जुन ने युद्धभूमि में पहुँचते ही उन सबको परास्त कर दिया और सात्यकि ने भी उन्हें कुचल दिया। इसे भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है?॥26॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.114.26 
ते च प्राप्यैव संग्रामे निर्जिता: सव्यसाचिना।
शैनेयेन परामृष्टा: किमन्यद् भागधेयत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वीर अर्जुन ने युद्धभूमि में पहुँचते ही उन सबको परास्त कर दिया और सात्यकि ने भी उन्हें कुचल दिया। इसे भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है?॥26॥
 
However, Arjuna, the brave warrior, defeated them all as soon as he reached the battlefield and Satyaki also crushed them. What else can this be called except fate?॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)