Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.25: हे भाई! मैंने, मेरे पुत्रों ने, मेरे परिवार के सदस्यों ने तथा मेरे सम्बन्धियों ने अपनी-अपनी क्षमतानुसार सभी सैनिकों को उपहार, सम्मान और आसन आदि देकर उनका सत्कार किया है॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पूजितो हि यथाशक्त्या दानमानासनैर्मया।
तथा पुत्रैश्च मे तात ज्ञातिभिश्च सबान्धवै:॥ २५॥
अनुवाद
हे भाई! मैंने, मेरे पुत्रों ने, मेरे परिवार के सदस्यों ने तथा मेरे सम्बन्धियों ने अपनी-अपनी क्षमतानुसार सभी सैनिकों को उपहार, सम्मान और आसन आदि देकर उनका सत्कार किया है॥ 25॥
O dear brother! I, my sons, my family members and my relatives have honoured all the soldiers to the best of our abilities by giving them gifts, respect and seats etc.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥