Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.12: यदि गर्व से भरे हुए मस्तकों वाले हाथियों से घिरी हुई मेरी यह विशाल सेना शत्रुओं द्वारा मारी गई है, तो भाग्य के अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है? ॥12॥ | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभिन्नकरटैश्चैव द्विरदैरावृतं महत्।
यदहन्यत मे सैन्यं किमन्यद् भागधेयत:॥ १२॥
अनुवाद
यदि गर्व से भरे हुए मस्तकों वाले हाथियों से घिरी हुई मेरी यह विशाल सेना शत्रुओं द्वारा मारी गई है, तो भाग्य के अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है? ॥12॥
If this huge army of mine, surrounded by elephants whose heads are brimming with pride, has been killed by the enemies, what other reason can there be except fate? ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥