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mahabharat 7.114.102: भीमसेन आदि पाण्डवों को युद्ध में परास्त करके कृतवर्मा धूमरहित अग्नि के समान शोभायमान होकर वहाँ खड़ा था ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  7.114.102 
जित्वा पाण्डुसुतान् युद्धे भीमसेनपुरोगमान्।
हार्दिक्य: समरेऽतिष्ठद् विधूम इव पावक:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन आदि पाण्डवों को युद्ध में परास्त करके कृतवर्मा धूमरहित अग्नि के समान शोभायमान होकर वहाँ खड़ा था ॥102॥
 
After defeating the Pandavas like Bhimasena in the war, Kritavarma stood there looking beautiful like a smokeless fire. ॥102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)