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mahabharat 7.113.67: कृतवर्मा के रोके जाने पर पाण्डव वीर युद्धभूमि में महान यश प्राप्त करने की इच्छा से उसकी सेना के साथ युद्ध करने के लिए तत्पर हो गये और महापुरुषों की भाँति दृढ़तापूर्वक खड़े हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.113.67 
निगृहीतास्तु भोजेन भोजानीकेप्सवो रणे।
अतिष्ठन्नार्यवद् वीरा: प्रार्थयन्तो महद्यश:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
कृतवर्मा के रोके जाने पर पाण्डव वीर युद्धभूमि में महान यश प्राप्त करने की इच्छा से उसकी सेना के साथ युद्ध करने के लिए तत्पर हो गये और महापुरुषों की भाँति दृढ़तापूर्वक खड़े हो गये।
 
When stopped by Kritavarma, the Pandava heroes, desiring to gain great fame in the battle-field, desired to fight with his army and stood firmly like great men. 67.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे त्रयोदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिप्रवेशविषयक एक सौ तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ६८ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)