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mahabharat 7.113.65-66: राजन! वीर कृतवर्मा ने अपना पराक्रम दिखाकर उन्हें रोक दिया। वे सभी वीर योद्धा कुछ-कुछ दुर्बल और अचेत हो रहे थे, फिर भी वे विजय के लिए प्रयत्नशील थे; किन्तु कृतवर्मा ने उन पर चारों ओर से बाणों की वर्षा करके उनके वाहनों को विचलित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  7.113.65-66 
विक्रम्य वारिता राजन् वीरेण कृतवर्मणा॥ ६५॥
यतमानांश्च तान् सर्वानीषद्विगतचेतस:।
अभितस्तान् शरौघेण क्लान्तवाहानकारयत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
राजन! वीर कृतवर्मा ने अपना पराक्रम दिखाकर उन्हें रोक दिया। वे सभी वीर योद्धा कुछ-कुछ दुर्बल और अचेत हो रहे थे, फिर भी वे विजय के लिए प्रयत्नशील थे; किन्तु कृतवर्मा ने उन पर चारों ओर से बाणों की वर्षा करके उनके वाहनों को विचलित कर दिया।
 
King! The brave Kritavarman showed his valour and stopped them. All those brave warriors were becoming a little weak and unconscious, but still they were striving for victory; but Kritavarman showered arrows on them from all sides and disturbed their vehicles. 65-66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)