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mahabharat 7.113.18-19: बहुत से घोड़े विशेष रूप से सुवर्णमयी रस्सियों और मोतियों की जालियों से सुसज्जित विचित्र वस्त्रों से विभूषित थे। वे बलवान सात्यकि के पैरों तले कुचले जाने पर भूमि पर गिर पड़े और प्राण त्याग दिए॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  7.113.18-19 
तपनीयमयैर्योक्त्रैर्मुुक्ताजालविभूषितै:॥ १८॥
उरश्छदैर्विचित्रैश्च व्यशोभन्त तुरङ्गमा:।
गतसत्त्वा महीं प्राप्य प्रमृष्टा दीर्घबाहुना॥ १९॥
 
 
अनुवाद
बहुत से घोड़े विशेष रूप से सुवर्णमयी रस्सियों और मोतियों की जालियों से सुसज्जित विचित्र वस्त्रों से विभूषित थे। वे बलवान सात्यकि के पैरों तले कुचले जाने पर भूमि पर गिर पड़े और प्राण त्याग दिए॥18-19॥
 
Many horses were especially adorned with golden ropes and strange coverings decorated with nets of pearls. Trampled by the powerful Satyaki, they fell on the ground and breathed their last.॥18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)