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mahabharat 7.112.9: हे प्रभु! नरश्रेष्ठ! आपकी आज्ञा पाकर मैं पाण्डु नन्दन अर्जुन के लिए इस अभेद्य सैन्य व्यूह को भेदकर उनके पास जाऊँगा॥9॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.112.9 
तवाज्ञां शिरसा गृह्य पाण्डवार्थमहं प्रभो।
भित्त्वेदं दुर्भिदं सैन्यं प्रयास्ये नरपुङ्गव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! नरश्रेष्ठ! आपकी आज्ञा पाकर मैं पाण्डु नन्दन अर्जुन के लिए इस अभेद्य सैन्य व्यूह को भेदकर उनके पास जाऊँगा॥9॥
 
Lord! Narashrestha! Following your orders, I will break through this impenetrable military array for Pandu Nandan Arjun and go to him. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)