श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  7.112.73-74h 
तथोक्त: सात्यकिं प्राह व्रज त्वं कार्यसिद्धये॥ ७३॥
अहं राज्ञ: करिष्यामि रक्षां पुरुषसत्तम।
 
 
अनुवाद
सात्यकि के ऐसा कहने पर भीमसेन ने उनसे कहा - 'ठीक है भाई! तुम अपना कार्य पूरा करो। हे महात्मन! मैं राजा की रक्षा करूँगा।'
 
When Satyaki said this, Bhimasena said to him - 'Okay brother! You go ahead to accomplish your task. O great man! I will protect the king.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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