|
| |
| |
श्लोक 7.112.70  |
संनद्धमनुगच्छन्तं दृष्ट्वा भीमं स सात्यकि:।
अभिनन्द्याब्रवीद् वीरस्तदा हर्षकरं वच:॥ ७०॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| उस समय कवच आदि से सुसज्जित भीमसेन को पीछे आते देख वीर सात्यकि ने उन्हें नमस्कार किया और उनसे ये हर्षपूर्ण वचन कहे-॥70॥ |
| |
| At that time, seeing Bhimasena coming behind him decked in armour etc., the brave Satyaki greeted him and said these joyful words to him -॥ 70॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|