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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  7.112.68 
तथैव भीमसेनोऽपि धर्मराजेन पूजित:।
प्रायात् सात्यकिना सार्धमभिवाद्य युधिष्ठिरम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार धर्मराज द्वारा सम्मानित भीमसेन ने भी युधिष्ठिर को प्रणाम किया और सात्यकि के साथ चले गये। 68.
 
Similarly, Bhimasena, honored by Dharmaraja, also bowed to Yudhishthira and went with Satyaki. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)