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mahabharat 7.112.66: इसके बाद सात्यकि ने हाथ जोड़कर युधिष्ठिर के चरणों में प्रणाम किया और युधिष्ठिर ने उनका माथा सूंघा। फिर वे उस विशाल रथ पर सवार हो गए।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  7.112.66 
युधिष्ठिरस्य चरणावभिवाद्य कृताञ्जलि:।
तेन मूर्धन्युपाघ्रात आरुरोह महारथम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सात्यकि ने हाथ जोड़कर युधिष्ठिर के चरणों में प्रणाम किया और युधिष्ठिर ने उनका माथा सूंघा। फिर वे उस विशाल रथ पर सवार हो गए।
 
After this Satyaki folded his hands and bowed down to Yudhishthira's feet and Yudhishthira smelled his forehead. Then he mounted that huge chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)