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mahabharat 7.112.61: तत्पश्चात् स्नान करके, शुद्ध होकर तथा यात्रा के समय शुभ कर्म करके सात्यकि ने एक हजार स्नातकों को स्वर्ण मुद्राएँ दान कीं ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.112.61 
तत: स्नात: शुचिर्भूत्वा कृतकौतुकमङ्गल:।
स्नातकानां सहस्रस्य स्वर्णनिष्कानथो ददौ॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् स्नान करके, शुद्ध होकर तथा यात्रा के समय शुभ कर्म करके सात्यकि ने एक हजार स्नातकों को स्वर्ण मुद्राएँ दान कीं ॥61॥
 
Thereafter, after taking a bath and purifying himself and performing the auspicious rituals during the journey, Satyaki donated gold coins to a thousand graduates. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)