श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.112.52-53h 
तस्माद् वै वाजिनो मुख्या विश्रान्ता: शुभलक्षणा:॥ ५२॥
उपावृत्ताश्च पीताश्च पुनर्युज्यन्तु मे रथे।
 
 
अनुवाद
अतः जो उत्तम गुणों से युक्त, विश्राम कर चुके, विहार करा चुके और जल पिला चुके हैं, उन उत्तम घोड़ों को पुनः मेरे रथ में जोतना चाहिए। ॥52 1/2॥
 
‘Therefore the best horses endowed with good qualities, who have rested, who have been taken a walk and have been given water, should be harnessed to my chariot again.' ॥ 52 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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