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mahabharat 7.112.5: हे राजन! मैं आपसे सत्य कहता हूँ कि तीनों लोकों में पाण्डुपुत्र अर्जुन से बढ़कर मुझे कोई प्रिय नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.112.5 
न हि मे पाण्डवात् कश्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।
यो मे प्रियतरो राजन् सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं आपसे सत्य कहता हूँ कि तीनों लोकों में पाण्डुपुत्र अर्जुन से बढ़कर मुझे कोई प्रिय नहीं है।
 
O King! I tell you the truth that in the three worlds there is no person who is dearer to me than Pandu's son Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)