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mahabharat 7.112.37-38h: हिमादुर्ग से एकत्रित पापी म्लेच्छों की सेना यहाँ धुएँ के समान काली दिखाई दे रही है। 37 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.112.37-38h 
अनीकं समवेतानां धूम्रवर्णमुदीर्यते॥ ३७॥
म्लेच्छानां पापकर्तॄणां हिमदुर्गनिवासिनाम्।
 
 
अनुवाद
हिमादुर्ग से एकत्रित पापी म्लेच्छों की सेना यहाँ धुएँ के समान काली दिखाई दे रही है। 37 1/2
 
‘The army of sinful mlecchas from Himadurga, gathered here, appears black like smoke. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)