श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  7.112.30-31 
एषामेते महामात्रा: किराता युद्धदुर्मदा:॥ ३०॥
हस्तिशिक्षाविदश्चैव सर्वे चैवाग्नियोनय:।
एते विनिर्जिता: संख्ये संग्रामे सव्यसाचिना॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ये युद्धोन्मादी किरात इन हाथियों के महावत हैं और इन्हें प्रशिक्षित करने में कुशल हैं। ये सभी अग्नि से उत्पन्न हुए हैं। सव्यसाची अर्जुन ने युद्धभूमि में इन सभी को परास्त किया॥30-31॥
 
‘These war-mad Kiratas are the mahouts of these elephants and are skilled in training them. All of them are born from fire. Savyasachi Arjuna defeated them all in the battlefield.॥ 30-31॥
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