श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.112.29-30h 
आसन्नेते पुरा राजंस्तव कर्मकरा दृढम्॥ २९॥
त्वामेवाद्य युयुत्सन्ते पश्य कालस्य पर्ययम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! समयचक्र का यह परिवर्तन तो देखो - जो लोग पूर्वकाल में आपकी डटकर सेवा करते थे, वे आज आपसे युद्ध करना चाहते हैं।॥29 1/2॥
 
‘Maharaj! Look at this change in the wheel of time - those who served you steadfastly in the past, want to fight with you today.॥ 29 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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