श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.112.21 
धनुर्वेदे गता: पारं मुष्टियुद्धे च कोविदा:।
गदायुद्धविशेषज्ञा नियुद्धकुशलास्तथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे सभी धनुर्वेद में पारंगत हैं। वे मुष्टियुद्ध में निपुण हैं, गदायुद्ध में निपुण हैं और कुश्ती में भी कुशल हैं॥ 21॥
 
‘All of them are well-versed in Dhanurveda. They are adept in fistfights, experts in mace fighting and skilled in wrestling as well.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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