Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.112.15-16h: प्रभु! मुझे वह स्थान ज्ञात है जहाँ मुझे जाना है। वह स्थान हल, भाले, गदा, भाले, ढाल, तलवार, बर्छी और कुल्हाड़ियों से भरा है। मैं श्रेष्ठ धनुष-बाणों से युक्त शत्रु सेना रूपी समुद्र का मंथन करूँगा। | mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! मुझे वह स्थान ज्ञात है जहाँ मुझे जाना है। वह स्थान हल, भाले, गदा, भाले, ढाल, तलवार, बर्छी और कुल्हाड़ियों से भरा है। मैं श्रेष्ठ धनुष-बाणों से युक्त शत्रु सेना रूपी समुद्र का मंथन करूँगा।
‘Prabhu! I know the place where I have to go. It is full of ploughs, spears, maces, spears, shields, swords, spears and tomahawks. I will churn the ocean of the enemy army filled with the best bows and arrows. 15 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥